अमृतपुष्प
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🙏 *जय श्रीकृष्ण* 🙏
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*मननं विश्वविज्ञानं, त्राणं संसारबन्धनात् ।*
*यतः करोति संसिद्धिं, मन्त्र इत्युच्यते ततः ।।*
पिंगलामत
‘‘समस्त विज्ञान और त्राण अर्थात संसार के बन्धनों से मुक्ति । इन दोनों कार्यों को उत्तम प्रकार से सिद्ध करने के कारण वह वर्ण समुदाय मन्त्र कहलाता है ।’’
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*अस्मिन्मासे त्रयस्त्रिंशद्देवाः सन्निहिता मुने ।*
*अत्र स्नानानिदानानि भोजनानि व्रतानि च ।।*
*तिलधेनुं हिरण्यं च रजतं भूमिवाससी ।*
*गोप्रदानानि कुर्वंति सर्वभावेन नारद ।।*
*तानि दानानि दत्तानि गृह्णंति विधिवत्सुराः ।*
स्कन्दपुराण, वै०ख०,का०मा०, ०१/२८-३०
"कार्तिक मास में तैंतीसों देवता मनुष्य के सन्निकट हो जाते हैं और वे इसमें किये हुए स्नान, भोजन, व्रत तथा तिल, धेनु, सुवर्ण, रजत, भूमि, वस्त्र आदि के दानों को विधिपूर्वक ग्रहण करते है ।"
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🙏 *जय मातादी* 🙏
००००००००००००००००
* डॉ. प्रदीप कनेश*
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⚜ १००१/०१-११-१९ ⚜
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🙏 *जय श्रीकृष्ण* 🙏
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*मननं विश्वविज्ञानं, त्राणं संसारबन्धनात् ।*
*यतः करोति संसिद्धिं, मन्त्र इत्युच्यते ततः ।।*
पिंगलामत
‘‘समस्त विज्ञान और त्राण अर्थात संसार के बन्धनों से मुक्ति । इन दोनों कार्यों को उत्तम प्रकार से सिद्ध करने के कारण वह वर्ण समुदाय मन्त्र कहलाता है ।’’
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*अस्मिन्मासे त्रयस्त्रिंशद्देवाः सन्निहिता मुने ।*
*अत्र स्नानानिदानानि भोजनानि व्रतानि च ।।*
*तिलधेनुं हिरण्यं च रजतं भूमिवाससी ।*
*गोप्रदानानि कुर्वंति सर्वभावेन नारद ।।*
*तानि दानानि दत्तानि गृह्णंति विधिवत्सुराः ।*
स्कन्दपुराण, वै०ख०,का०मा०, ०१/२८-३०
"कार्तिक मास में तैंतीसों देवता मनुष्य के सन्निकट हो जाते हैं और वे इसमें किये हुए स्नान, भोजन, व्रत तथा तिल, धेनु, सुवर्ण, रजत, भूमि, वस्त्र आदि के दानों को विधिपूर्वक ग्रहण करते है ।"
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🙏 *जय मातादी* 🙏
००००००००००००००००
* डॉ. प्रदीप कनेश*
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⚜ १००१/०१-११-१९ ⚜
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