अमृतपुष्प

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                  🙏 *जय श्रीकृष्ण*  🙏
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 *नास्ति मातृसमं तीर्थ पुत्राणां च पितृः समम्।*
 *तारणाय।  हितायैव इहैव च    परत्र च।।*
 *वेदै रपि च किं विप्र पिता येन च पूजितः।*
 *माता न पूजिता येन तस्य वेदा निरर्थकाः।।*
 *एष पुत्रस्य वै    धर्मस्तथा तीर्थं नरेष्विह।*
 *एष पुत्रस्य वै मोक्षस्तथा जन्म फलं शुभम्।।*
         पद्मपुराण, भूमिखण्ड ६३/१४,१९,२१

‘’पुत्रों के इस लोक और परलोक के कल्याण के लिये माता-पिता के समान कोई तीर्थ नहीं है। माता-पिता का जिसने पूजन नहीं किया, उसे वेदों से क्या प्रयोजन है? (उसका वेदाध्ययन व्यर्थ है।) पुत्र के लिये माता-पिता का पूजन ही धर्म है, वही तीर्थ है, वही मोक्ष है और वही जन्म-का शुभ फल है।‘’
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*यत्किंच दत्तं विप्रेंद्र तपश्चैव तथा कृतम् ।*
*तदक्षय्यफलं प्रोक्तं विष्णुना प्रभविष्णुना ।।*
                            स्कन्दपुराण, ०१/३०

‘‘कार्तिक में जो कुछ दिया जाता है, जो भी तप किया जाता है, उसे सर्वशक्तिमान भगवान विष्णु ने अक्षय फल देने वाला बतलाया है ।‘‘
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                   🙏 *जय मातादी* 🙏
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                    * डॉ. प्रदीप कनेश*

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              _*⚜ १०००/२४-१०-१९ ⚜*_

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